...उन्होंने हाथ से लिख दी पुस्तिका

16 दिसंबर 1979 को एक संस्था संवेदना-साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच अस्तिव में आई, जो अपनी स्थापना से लेकर अब तक सांस्कृतिक एवं सहित्यिकआयोजनों में तल्लीन है। उसनें कभी काव्य समारोह आयोजित किए, तो कभी प्रदर्शनियां लगाई, कभी सम्मान समारोह हुए तो कभी स्मारिकाएं निकालीं, और शुरूआत में तो ललक ऐसी थी कि हस्तलिखित स्मारिका शब्दशिल्प निकाल दी, जो आज दस्तावेज बन गई है। हाल ही में संवेदना-साहित्यिक एवं सांसकृतिक मंच ने अपना स्थापना दिवस मनाया। जब हमने उसके बारे में विस्तार से जाना तो ये बानगी सामने आई।

>> पंकज व्यास,
16 दिसंबर 1979 को पी.एच.ई. के इंजीनियर मनोज शुक्ला के निवास पर कुछ कवि मित्रों ओमरंगशाही व सुरेश परमार के संयुक्त प्रयास से एक संस्था संवेदना, साहित्यिक, सांस्कृति मंच अस्तिव में आई। संस्था संवेदना की साहित्य के प्रति ललक ऐसी थी कि संस्था की प्रथम पुस्तिका 'शब्द शिल्प' निकाली, हाथ से लिख दी।
रतलाम के इतिहास में निकाली गई यह पुस्तिका हाथ से लिखी होने के कारण आपने आप में एक दस्तावेज बन पड़ी है। इस हस्तलिखित प्रथम शब्द-शिल्प के संपादन मंडल में शामिल थे, खुद सुरेश परमार 'अतुलÓ, ओम रंगशाही और योगेश अधिकारी। इस पुस्तिका में सुरेश आनंद, अनवर हुसैन, निशा व्यास, ओमरंगशाही, श्यामसुंदर दुबे, अशोक शर्मा, डॉ. हरिओम तिवारी, कांतिलाल पंवार, हेमन्त अकेला, श्रेणिक जैन, सुरेश परमार 'अतुलÓ, मोहन पंवार की कविताएं हैं। तत्कालीन डॉ. हरिओम तिवारी का एक आलेख भी है।
कदाचित इसे निकालने वालों को भी पता नहीं था कि उनकी यह कोशिश दुर्लभ दस्तावेज बन जाएगी, इसका प्रमाण है कि स्वयं सुरेश परमार के पास में इसकी केवल एक ही प्रति बची है।
बाद में संस्था ने कंप्यूटराईज्ड अच्छे कलेवर वाली अब तक शब्द शिल्प के नाम से( हस्तलिखित को छोड़कर) चार स्मारिकाएं निकाली हंै, लेकिन प्रथम पुस्तिका जो हाथ से लिखी थी, ज्यादा डिजाईन-लेआऊट और अब अपने फटे पेंज, कवर पीले पड़े कागज के बावजूद अपनी अहमियत रखती है। जब मैंने उन्हें इस बारे में ध्यान दिलाया तो अब वे इसकी और फोटोकॉपी करवाने के मुड में हैं।
18 जनवरी 1985 में स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में तीन दिवसीय वार्षिक समारोह का आयोजन किया गया। प्रथम दिन स्व. प्राणगुप्त की स्मृति पर केन्द्रित डॉ. दुर्गा शर्मा-चित्रकार के चित्रों की प्रदर्शनी लगाई गई। तत्कालीन युवा नवोदित मुख बधिर चित्रकार शैलेन्द्र धारवा एवं राजेन्द्र परमार (रविराज) के लोकशैली संबंधी चित्र भी इस प्रदर्शनी में शामिल थे। साहित्यकार डॉ. जयकुमार जलज, डॉ. हरिशचन्द्र पाठक, निर्मल शर्मा, प्रो. रतन चौहान, माओत्स्सतुंग प्रो. वर्मा, प्रो. दिनकर सोनवलकर (जावरा) के कविता पोस्टर की प्रदर्शनी नगर निगम में लगाई गई।
द्वितीय दिन नगर की संगीत संस्था सप्तरंग द्वारा उनके प्रशिक्षित नृत्यांगनाओं ने प्रस्तुति दी, जिसमें कु. पियंका भट्टï, कु. अंजु संघवी के कत्थक नृत्य को सराहा गया। गीतकार जितेन्द्र सिंह सागर टिटूसिंह नान्दरा ने गीत-गजल प्रस्तुत किए।
तृतीय दिन- स्थानीय श्रमिक गीतकार (आकाशवाणी इंदौर), जमनालाल लिम्बोदिया, वरिष्ठï सहित्यकार सुरेश आनंद, शंकर दत्त त्रिपाठी एवं युवा चित्रकार शैलेन्द्रधारवा, (मूकबधिर कलाकार) का अभिनन्दन शाल-श्रीफल एवं अभिनंदन पत्र से संवेदना के तत्वावधान में सम्मानित किया गया।
तत्कालिक म.प्र. शासन राज्यमंत्री प्रभुदयाल गेहलोत का आतिथ्य मिला। गल्र्स कॉलेज के तत्कालिक प्राचार्य सुस्मिता चटर्जी की अध्यक्ष रही। विशेष आतिथ्य रहा तत्कालिन जिला पुलिस अधीक्षक हरिशंकर सोनी(कवि) का।
इस मौके पर स्व. प्राण गुप्त(स्थानीय रचनाकार) की स्मृति में डॉ. दुर्गा शंकर द्वारा रेखांकित चित्रों व नवोदित चित्रकार शैलेन्द्र धारवा के द्वारा चित्रों की प्रदर्शनी, चित्रकला प्रदर्शनी, वादविवाद प्रतियोगिता एवं अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया।
संवेदना संस्थाओं ने अब तक कईं प्रतिभाओं को सम्मानित किया हैं, जिसके तहत संस्था ने तत्कालिक डिप्टी कलेक्टर आर.पी. श्रीवास्तव(साहित्यकार) 1९८१ में साहित्यक समारोह में अभिनंदन किया।
सप्तरंग सगीत नृत्य संस्था के संस्थापक अध्यक्ष सा. नमेन्दु बेनर्जी, चित्रक ार डॉ. दुर्गाशर्मा, हरेन्द्र जोशी- संगीतज्ञ, श्रीमती निर्मला कजवाड़क र-साहित्यिक रचनक ार, जिला स्तरीय सुगम गायन प्रतिस्पर्धा (प्रख्यात पाश्र्व गायक स्व. मुकेश की स्मति में) जूनियर बाल कलाकार स्तर पर प्रतियोगिता में विजेता दीपक पाठक प्रथम, कु. रूपाली-द्वितीय, प्रोत्साहन पुरस्कार कु. संगीता व्यास एवं अजय पाठक सीनियर प्रतिस्पर्धा में शशांक बैरागी, गिरीश शर्मा, प्रोत्साहन स्वरूप शैलेन्द्र मेहता एवं राजेन्द्र पर·ार रविराज, दिलीप व्यास, यशवंत बैरागी का सम्मान क िया गया।
सम्मान की क ड़ी में इंदौर की लेखिका डॉ. चंद्रकिरण गुप्ता, ख्यातनाम चित्रक ार रामचन्द्र भावसार, उज्जैन, कवि विचारक डॉ. सोमतीप्रसाद सोम, भी सम्मानित किए जा चुके हैं। स्थानीय चित्रकार कु. क ल्पना आपटे क ा सम्मान एवं प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। प्रख्यात कवियित्री शायरा, शांति शबा धार को भी सम्मानित किया।
14 सितंबर 1996 में हिन्दी दिवस पर बाल कविता प्रतिस्पर्धा में पुरस्कृत कु. हीतेशी पाठक, कु. सपना पंडित, कौस्तुक कुलकर्णी, संत नामदेव स्कूल के विद्यार्थी राहुल वर्मा को पुरस्कृत किया गया। 199० में गुलाब उद्यान कलेक्टोरेट परिसर में मुंबई के फिल्मी गीतकार स्थानीय वेयर हाऊस के प्रभारी अधिकारी विजय राही का सम्मान, पखावज वादक इन्दरलाल राणा व कांतिलाल पंवार प्राण का अभिनंदन किया गया।
अमर श्याम के प्रधान संपादक व हास्य व्यंग्य रचनाकार मुस्तफा आरिफ उज्जैन का सम्मान किया 1 फरवरी 2002 में किया।
काव्य-समारोह
2004-05-06 में रंग बरसे हास्य व्यंग्य काव्य समारोह का आयोजन, किया गया। इन काव्य आयोजनों में जुझार सिंह भाटी, सीताराम निरंजनी सूरज, हरिशंकर भटनागर, श्रीमती आशा सक्सेना, श्रीमती इन्दुसिन्हा, सुश्री निर्मला राय, बाबुलाल नाशात उज्जैनी, अलक्षेन्द व्यास, सतीश श्रोत्रिय, जावरा, भारत सिंह गुर्जर सरवड़ जमुनिया, सुरेश प्रवासी, रतलाम अब्दुल सलाम खोखर, चंद्रशेखर पंवार, अभय तिवारी, प्रकाश हेमावत जावरा, गणपत गिरी गौस्वामी, सुरेश परमार अतुल, श्रीमती सिद्घेश्वरी शर्मा, राजेन्द्र जोशी पुष्प बडऩगर, समाजसेवी अशोक अग्रवाल, मदनवर्मा पिपलौदा ने रचना पाठ किया है।
संगीत निशा
17 जनवरी 1982 मेें गायक स्व. कुन्दनलाल सहगल की स्मृति में संगीता निशा का दो दिवसीय आयोजन किया गया। इसमें मुख्य अतिथि थे सिविल जज मुकेश भटनागर।
संगीत निशा में प्रो. कोटडवानी, हरेन्द्र जोशी, संजय मुसले, लक्ष्मीकांत जोशी, श्री कंडारे, किशनलाल पंवार, शैलेन्द्र पंवार आदि ने गीत-संगीत,गजल की प्रस्तुतियां दी।
विमोचन
संवेदना के तत्वावधान में 1981 में ही वयोवृद्घ कवि एडवोकेट सोभागमल द्वारा रचित बच्चों पर केन्द्रित 'बालदीपÓ का विमोचन तत्कालीन जनसंपर्क अधिकारी डॉ. राजेन्द्र कुमार के आतिथ्य में संपन्न हुआ।
संस्थापक का सम्मान-
16 दिसंबर 1983 में संवेदन मंच के संस्थापक अध्यक्ष सुरेश परमार अतुल का निराला साहित्य मंच के अध्यक्ष राजेन्द्र वर्मा ने प्रमाण पत्र भेंट कर सम्मान किया।
समीक्षा
2003 में निरंजनकुमार निराकार के काव्य संकलन मनु आंख की नींद की समीक्षा की।
संस्था को नगर के साहित्यकारों ब्रजमोहन झालानी-संरक्षक, पीरूलाल बादल, डॉ. सोमती प्रसाद सोम, जयकुमार जलज, अजहर हाशमी, स्व. बी.के. व्यास, हेमन्त अकेला, राजेन्द्र पुष्प, राजकुमार हंस का योगदान सराहनीय रहा। संस्था के पदाधिकारियों में अध्यक्ष सुरेश परमार अतुल, महीपतराव पंवार, श्रीमती आशा सक्सेना, उपाध्यक्ष, वीरेन्द्र हीतिया, सुश्री मनीषा चौधरी, श्रीमती इन्दु सिन्हा, दिनेश जैन एवं सलाहकार के रूप में अशोक अग्रवाल, पुरन चौथियानी-होटल स्वाद, गोपाल टंच, डॉ. हरिओम तिवारी, शैलेन्द्र शर्मा शामिल हैं। संवेदना संस्था की यह तो संक्षेप में बानगी है। संस्था अपनी स्थापना से लेकर अब तक अनवरत् साहित्यिक, सांस्कृतिक गतिविधियों को मंच देने में लीन है।
(जैसा सुरेश परमार 'अतुलÓ ने बताया)

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