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starting blogging - pankaj vyas

hello everyone, from today I am again starting blogging after a long time. this blog aap hum is for hindi, but i have to English post. in my cell hindi is not working. i had two options - eieither I dont write any post or i write in english. so, finally i have selecsel second option to write post in english. I hope my blog lovers and Hindi lovers, hindi premi, hindi bhashi will undunderstand this thithi.

second reason to write post in english is that nowadays i teach English. so the posts of this blog aapaap-hum.blogspot  will be also helpful for English lovers and english learners.

here, i m thankful to all blog visitors that i hadn't been posting for long period, but due to blog visitors and blog lovers, this blog is still popular. i am again thankful for them who made my blog popular in india and abroad.

pankaj vyas

Daily routine sentences 1

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पठानकोट हमला: सेना व सरकार को मोरल सपोर्ट दो

पंकज व्यास, इंदौर/रतलाम 
पठानकोट हमले के वक्त देश भर में सरकार की पाक के लिए नीतियों की समीक्षाएं हो रही है . भारत पाक पोलटिक्स पर जमकर कर आलोचनाएँ-समीक्षाएं  हो रही है. अब जबकि  देश के जवान शहीद  हो रहे हो, आतंकवादियों से दो-दो हाथ कर रहे हो,  हमें समीक्षा, आलोचनाएँ करने की बजाय सेना व सरकार का मनोबल बढ़ाना चाहिए। समीक्षाएं, आलोचनाएँ बाद में भी हो सकती है.

आप किसी भी राजनीतिक  दल, धर्म-मजहब, या विचारधारा से ताल्लुकात रखते हो,  उन सब से बढ़कर देश हित की बात होना चाहिए। आपकी देशभक्ति पर सवालिया निशान लगाना मेरा मकसद नहीं, लेकिन उस वक्त जबकि देश के जाबाज योद्धा आतंकियों को अपना पराक्रम दिखा रहे हो, अपना लहू बहा रहे हो, हम इस  बात का ध्यान तो रख ही सकते है कि हमारी समीक्षाएं, टिप्पणियाँ, सोशल मीडिया एक्टिविटी सरकार व सेना का मनोबल बढ़ने वाली हो, सेना व सरकार का हौसला बढ़ाने वाली हो. मैदान में हौसले का रोल महत्वपूर्ण होता है. कम से कम हम सेना व सरकार को मोरल सपोर्ट तो दे ही सकते है. मैं आप से इस वक्त ये कहना पसन्द करूँगा कि -
भारत हित चिंतन हो,
मातृ भूमि का वंदन हो,
और लहू बहाते जो 
उन वीर शहीदों…

निरंतर लिखो, आलोचकों की परवाह मत करो -बैरागी

जमनेश नागौरी रचित 'पीड़ा की पगडंडी' मुक्तक संकलन का विमोचन  नीमच| कविता जहां लोरी से बच्चों को सुलाती है, वहीं कविता जागरण भी करती है। निरंतर लिखने से कब सरस्वती विराजमान हो जाए कहा नहीं जा सकता। कविता भाषा, वाणी और दर्शन से सार्थक होती है। नीमच जिला देशभर में साहित्य के नाम से भी जाना जाता है। निरंतर लिखो, आलोचकों की परवाह मत करो। संसार में आलोचकों के स्मारक नहीं होते।
यह बात साहित्यकार बालकवि बैरागी ने कही। वे आनंद मंगल भवन में जमनेश नागौरी रचित 'पीड़ा की पगडंडी' मुक्तक संकलन के विमोचन समारोह में बोल रहे थे। सीआरपीएफ डीआईजी बीएस चौहान ने कहा पुस्तक 40 वर्षों की साहित्य साधना का निचोड़ है। गजलकार प्रमोद रामावत ने कहा नवोदित कलमकारों को पढऩे-लिखने के लिए प्रोत्साहन देने हम सदा तत्पर हैं।
मंचों पर कविता के नाम पर फूहड़पन बढ़ता जा रहा है। कवि जमनेश नागोरी ने कहा पीड़ा की पगडंडी के लिए मैं चार दशकों तक अपनी बगिया को सींचता रहा हूं। मेरे काव्य उपवन का यह प्रथम प्रसून है। सिंगोली नपं के पूर्व अध्यक्ष घीसालाल पटवा ने कहा सामाजिक क्षेत्र के बाद साहित्य में आना चुनौतीपूर्ण होता …

ये कैसी आजादी

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पंकज व्यास चाहे लोकपाल बिल हो, या काला धन भारत में लाने की मांग, इस आजाद (?)देश में विरोध के लिए भी कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। अन्ना हजारे से लेकर बाबाराम देव तक जो घटनाक्रम चला, व चल रहा है, उससे यह सवाल सहज ही उठ जाता है कि क्या आजादी का पंछी बेबश है? उसकी आंखों में बेबसी साफ नजर आ जाती है। स्वतंत्र भारत में आजादी के पंछी को घुटन महसूस हो रही है। गुलामी की जंजीरें तोड़ तो दी गई हंै, पिंजरे को खेल तो दिया है, लेकिन लगता है कई पहरूएं बिठा दिए गए है। वो सोच रहा है ये कैसी आजादी? बीते बरस जब हम १५ अगस्त मना रहे थे, तब तक कश्मीर जल रहा था, अलगाववाद की लपटें उठ रहीं थीं, राज्यों में नक्सलवाद हाहाकार मचा रहा था, महाराष्ट्र में भाषायी आतंकवाद जब-तब खड़ा हो रहा था, तो हर ओर जातिवाद गहराता जा रहा था, तब कहीं कोई ऐसा व्यक्तित्व नजर नहीं आ रहा था, जिसकी एक आवाज पर देशवासी जातपात, धर्म-प्रांत, भाषा, अगड़े-पिछड़े, दलित-सवर्ण के भेद को भुलाकर खड़े हो जाए। लेकिन, इस स्वतंत्रता दिवस तक आते-आते परिदृश्य बदल चुका है। स्वतंत्र भारत केआसमान पर दो सितारे ऐसे उभरे हैं, जिनकी आवाज पर लोग सारे…