मुक्तक - पंकज व्यास
दिलो में नफरते है, बहूत दूर होनी चाहिऐ ।
मंदिर-मस्जिद में दूरिया है बहूत, नष्ट होना चाहियें
धर्मं निरपेक्ष देश है मेरा ,
यहाँ हर धर्मं का सम्मान होना चाहियें ।
मंदिर-मस्जिद में दूरिया है बहूत, नष्ट होना चाहियें
धर्मं निरपेक्ष देश है मेरा ,
यहाँ हर धर्मं का सम्मान होना चाहियें ।
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