हाय रे, वादे भी नसीब नहीं...,

>>पंकज व्यास
ये विधानसभा के 2008 के चुनाव हो रहे हैं। अपने रतलाम में भी हो रहे हैं और उसके लिए जोरआजमाईश जारी है। सबके सब प्रदेश के गृह मंत्री हिम्मत कोठारी के पीछे पड़े हैं। चाहे कांग्रेस के प्रमोद गुगालिया हो, निर्दलीय प्रत्याशी पारस सकलेचा हो, बसपा के झालानी जी हो या फारवर्ड ब्लॉक के राष्ट्र pemi सुभाष अग्रवाल हो या कोई ओर... सबका कहना है कि हिम्मत कोठारी ने कुछ नहीं किया, कुछ नहीं किया 30 सालों में और हिम्मत कोठारी भी अपने कामों को बताने में लगे हैं कि मैंने ये किया वो किया... और आज बुधवार को बीजेपी का भोंपू भी गाड़ी में चित्कार, चित्कार कर कह रहा है कि आईए, देखने महलवाड़ा, हिम्मत कोठारी ने क्या विकास किया? सभा को संबोधित करने आ रहे हैं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह गुरुवार को शाम सात बजे।
हर बार विधानसभा में अपन लोग सुनते हैं कि प्रत्याशी वादे करते हैं कि मैं ये कर दूंगा, वो कर दूंगा, अलां ..फलां... पर, पर, पर अबकी बार तो ·िसी सभा में ये सुनने को कम ही मिल रहे हैं। आश्वासन सुनने को कम मिल रहे हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि अब कोई वादा नहीं बचा हो। अब तो आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। प्रतिस्पर्धा चल रही है, होना भी चाहिए, पर स्वच्छ प्रतिस्पर्धा का अभाव खलता है।
सब ओर ये ही सुनाई देता है, उसने ये नहीं किया, वो नहीं किया, मैंने वो किया आदि-आदि पर कोई बता नहीं रहा खूद के बारे में कि वो जीत जाएंगे तो क्या करेंगे?
कम से कम जनता को आश्वासनों के सहारे तो जीने दो, उसके जीने का सहारा मत छीनो, आश्वासन तो दो, आश्वासन से आशा का संचार होगा, आशा का संचार होगा तो आपको वोट मिलेंगे, आपको वोट मिलेंगे, भले ही जितने वादे करोंगे उतने पूरे न भी करों, तो भी क्या, शरमासरमी उनमें से कुछ तो पूरे करोंगे। पर, वादे ही नहीं करोंगे, आश्वासन हीं नहीं दोंगे तो फिर काहे की शरम। आप तो कह दोंगे कि हमने कोई कहा थोड़े ही था।
आपको ऐसा नहीं लगता कि ने_ïूई आरोप-प्रत्यारोप से निकल कर प्रत्याशियों को अपनी कार्ययोजना को लोगों को बताना चाहिए कि वे जब चुनाव जीत जाएंगे, तो क्या करेंगे? अपनी कार्य योजना बतानी चाहिए। भाया, हमारे रतलाम के तो ये हाल हैं, आपके क्या हाल है?

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