मो. अयाज खिलजी कि कविता ...तो कोई बात बने

...तो कोई बात बने
>>मो. अयाज खिलजी, रतलाम
पत्थरों पर नाम अपना हर कोई लिख सकता है,
सागर की लहरों को रोका और रेत पर नाम लिखो
        तो कोई बात बने।

पार्टियां, मौज-मस्ती और रंगरेलियां,
खूब पैसा बहाते हैं हम इन पर,
किसी नंगे को कपड़ा और किसी भूखे को खाना खिलाएं,
        तो कोई बात बने।

भर गया है घड़ा लबालब
झूठ, भ्रष्टïाचार और अत्याचार से
इस युग में फिर एक बार कृष्ण आए
        तो कोई बात बने।

गंगोत्री से गंगासागर तक तो
मुर्दा भी चला जाता है,
अपनी शक्ति का परिचय दो
और गंगासागर से गंगोत्री तक जाओ
        तो कोई बात बने

पत्थरों पर नाम अपना, हर कोई लिख सकता है
सागर की लहरों को रोको और रेत पर नाम लिखो
        तो कोई बात बने, तो कोई बात बने।
>>मो. अयाज खिलजी, रतलाम

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लगता है टिप्पणि वाली ’मिस्टेक’ ठीक हो गयी।ब्लॉग लेखन जारी रखें ।

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